‘भारत की आजादी को लेकर अस्पृश्यों के मन में कोई आस्था नहीं है’ इस प्रकार बदमाशीभरा, निंदनीय और दुष्ट प्रचार हमारे विरोधी राजनीतिक लोगों, उनके दलों तथा राष्ट्रीय अखबारों के जरिए किया जाता है। हम राष्ट्र विरोधी देश को डुबोने वाले हैं, इस प्रकार के हमले हम पर किए जाते है। अस्पृश्यों को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता के अधिकार दिलाने की दिशा में चल रहा यह आंदोलन उन्हें अगर देश को डुबाने वाला लगता है तो उनके कथन पर मुझे बिल्कुल अचरज नहीं है।किसी भी अन्य समुदाय की तुलना में अस्पृश्यों के मन में पलने वाली देश की आज़ादी के प्रति आस्था कम नहीं है। उल्टे वह अधिक ही है। लेकिन देश की आज़ादी के साथ साथ हमें अपने समाज की आज़ादी भी चाहिए। हमे किसी प्रकार के अधिकार न मिलें, हमारा कोई पृथक अस्तित्व न बनें, इस देश में हम सम्मान के साथ न रहें। यहीं उनकी मानसिकता है।वे चाहते है कि कभी हमारा सिर ऊंचा न उठे और हम हमेशा उनके गुलाम बन कर जिये। हमें राजनीतिक क्षेत्र से हमेशा के लिए नष्ट कर हजारों सालों से हमारे पैरों में जो बेड़िया पड़ी हुई हैं इन लोगों ने उन्हें ओर कसने की ही कोशिश की है। ब्रिटिश सरकार और इस देश के अन्य लोगों को यह सनद रहे कि इस देश की सत्ता में हमें उत्तराधिकार चाहिए। उसके लिए हम लड़ेंगे, अत्याचार में हमारा विश्वास नहीं है। हम अत्याचारों से नहीं डरते।”
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