Description
यह पुस्तक मुख्य रूप से प्राचीन भारत के उस कालखंड का वर्णन करती है जब चीनी बौद्ध यात्री भारत आए थे:
ऐतिहासिक साक्ष्य: जब भारत में लिखित इतिहास या कालक्रम की कमी थी, तब चीनी भिक्षुओं (विशेष रूप से ह्वेनसांग और फ़ाह्यान) द्वारा लिखे गए यात्रा वृत्तांतों ने भारतीय इतिहास की सटीक तिथियों और घटनाओं को पुनर्गठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्राट हर्षवर्धन और नालंदा: पुस्तक में राजा हर्षवर्धन के शासनकाल, उनके दान-धर्म, तथा तत्कालीन नालंदा विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, शिक्षा पद्धति और विद्वानों का विस्तृत वर्णन है।
सामाजिक और धार्मिक जीवन: चीनी यात्रियों के दृष्टिकोण से प्राचीन भारतीय समाज, बौद्ध धर्म के प्रसार, आम जनजीवन, न्याय व्यवस्था और नगरों की स्थिति का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है।
बौद्ध ग्रंथों का संकलन: चीनी यात्रियों का मुख्य उद्देश्य बौद्ध पांडुलिपियों और ग्रंथों को एकत्र कर चीन ले जाना था, जिससे भारतीय बौद्ध दर्शन सुरक्षित रह सका।






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