Description
“बामसेफ की पत्रकारिता” (Bamcef Ki Patrakarita) पुस्तक के लेखक डॉ. रूपचंद गौतम हैं। यह पुस्तक बहुजन आंदोलन, बामसेफ और वैकल्पिक मीडिया के इतिहास पर आधारित एक महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनैतिक दस्तवेज़ है
बामसेफ का स्थापना काल और उद्देश्य:
मान्यवर कांशीराम द्वारा स्थापित BAMCEF (All India Backward and Minority Communities Employees Federation) केवल एक कर्मचारी संगठन नहीं था, बल्कि यह समाज में वैचारिक चेतना फैलाने की एक मुहिम थी। पुस्तक में बामसेफ के शुरुआती दिनों और उसके प्रचार-प्रसार के माध्यमों का विश्लेषण किया गया है।
वैकल्पिक मीडिया (Alternative Media) की भूमिका:
मुख्यधारा (Mainstream) मीडिया द्वारा शोषित व वंचित वर्गों के मुद्दों को नज़रअंदाज़ किए जाने के जवाब में बामसेफ ने पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लिया। इस पुस्तक में बताया गया है कि कैसे पत्रिकाओं, बुलेटिनों और पैम्फलेट्स के ज़रिए दलित-बहुजन चेतना को जगाया गया।
प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं का दस्तावेज़ीकरण:
पुस्तक में मान्यवर कांशीराम और बामसेफ द्वारा शुरू की गई प्रमुख पत्रिकाओं जैसे ‘द अप्रेस्ड इंडियन’ (The Oppressed Indian), ‘बहुजन संगठक’, और ‘माइनॉरिटी इंडिया’ के योगदान और उनके पत्रकारिता के स्वरूप को विस्तार से दर्ज किया गया है।
सामाजिक परिवर्तन में पत्रकारिता:
डॉ. रूपचंद गौतम ने यह रेखांकित किया है कि कैसे बामसेफ की पत्रकारिता ने कर्मचारियों, बुद्धिजीवियों और युवाओं को संगठित करने तथा उनके अंदर राजनीतिक व सामाजिक समझ पैदा करने का काम किया।
दलित-बहुजन आंदोलन और इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एवं भारतीय राजनीति, सामाजिक आंदोलनों और वैकल्पिक पत्रकारिता (Alternative Journalism) के शोधकर्ताओं के लिए यह पुस्तक बहुत जरूरी है।






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