Description
डॉ. विजय कुमार त्रिशरण (जिन्हें अक्सर विनय/विजय कुमार त्रिशरण के नाम से जाना जाता है) बहुजन-दलित साहित्य, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों पर केंद्रित एक प्रमुख लेखक एवं सामाजिक चिंतक हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “आरक्षण: मिथक या तथ्य” भारतीय समाज में आरक्षण को लेकर फैली भ्रांतियों और इसके संवैधानिक व सामाजिक पहलुओं का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक भारतीय आरक्षण प्रणाली के पीछे के ऐतिहासिक और वैधानिक कारणों को उजागर करती है। समाज में आरक्षण को लेकर जो सामान्य भ्रम, गलत धारणाएं (मिथक) और तथ्यहीन बहसें चलती हैं, लेखक ने उनका तर्कसंगत एवं आंकड़ों के साथ खंडन किया है।
पुस्तक में स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण कोई ‘गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम’ नहीं है, बल्कि यह सदियों से हाशिए पर रहे समुदायों (SC, ST, OBC) का शासन-प्रशासन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व (Representation) सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है।






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