Description
आचार्य जुगल किशोर) द्वारा लिखित पुस्तक “बाबासाहेब कैसे पहुंचे संविधान सभा में?” डॉ. बी. आर. आंबेडकर के संविधान सभा में प्रवेश की ऐतिहासिक और संघर्षपूर्ण यात्रा पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्ष
मुस्लिम लीग और बंगाल से चुनाव: जब संविधान सभा का गठन हो रहा था, तब कांग्रेस और अन्य प्रमुख दलों के विरोध के कारण बाबासाहेब को बॉम्बे (मुंबई) से संविधान सभा के लिए चुने जाना कठिन था। इसके बाद वे बंगाल से जोगेंद्र नाथ मंडल और मुस्लिम लीग के सहयोग से जीतकर संविधान सभा में पहुंचे।
विभाजन का संकट: देश के विभाजन के बाद जिस क्षेत्र (पूर्वी बंगाल) से डॉ. आंबेडकर चुने गए थे, वह पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। इसके कारण उनकी संविधान सभा की सदस्यता समाप्त हो गई थी।
2. संविधान सभा में पुन: प्रवेश
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की अनिवार्यता: संविधान निर्माण के लिए डॉ. बी. आर. आंबेडकर की कानूनी विद्वता और बौद्धिक क्षमता इतनी असाधारण थी कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद और बी. एन. राव ने यह महसूस किया कि उनके बिना संविधान बनाना संभव नहीं है।
एम. आर. जयकर का इस्तीफा और बॉम्बे से वापसी: डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आग्रह पर बॉम्बे प्रेसिडेंसी से एम. आर. जयकर ने इस्तीफा दिया, और उस सीट पर उपचुनाव कराकर बाबासाहेब को पुन: संविधान सभा में भेजा गया।
3. पुस्तक का महत्व
यह पुस्तक उन राजनीतिक परिस्थितियों, चालों और ऐतिहासिक तथ्यों का विस्तार से विश्लेषण करती है जिन्होंने बाबासाहेब को संविधान सभा तक पहुँचाने में भूमिका निभाई।
इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि बाबासाहेब का संविधान सभा में पहुँचना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण मोड़ वाली घटना थी।






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