Description
डॉ. विलास खरात बहुजन, दलित और भारत के बहुसांस्कृतिक इतिहास के पुनर्लेखन व विश्लेषण के लिए जाने जाने वाले एक प्रमुख इतिहासकार, लेखक और विचारक हैं। उनकी पुस्तक “क्या राणा सांगा और राजा जयचंद गद्दार थे?” इतिहास के प्रचलित आख्यानों (Narratives) पर सवाल उठाती है और तथाकथित ‘राष्ट्रभक्ति’ बनाम ‘देशद्रोह’ के पैमानों का निष्पक्ष विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
मध्यकालीन भारतीय इतिहास में राजा जयचंद (गहड़वाल) और राणा सांगा (संग्राम सिंह) को लेकर कई तरह की धारणाएं और लोककथाएं प्रचलित हैं। जहाँ एक ओर राजा जयचंद को मोहम्मद गोरी को बुलाने और पृथ्वीराज चौहान से विश्वासघात करने के आरोप में ‘देशद्रोही’ के प्रतीक के रूप में पेश किया जाता है, वहीं राणा सांगा को राजपूत गौरव का प्रतीक माना जाता है।
डॉ. विलास खरात इस पुस्तक में ऐतिहासिक दस्तावेजों, प्राथमिक स्रोतों और तर्कों के आधार पर यह सवाल उठाते हैं कि क्या उस दौर में ‘राष्ट्र’ (Nation) की आधुनिक अवधारणा मौजूद भी थी या यह केवल मध्यकालीन राजाओं के बीच अपने-अपने राज्यों के विस्तार और वर्चस्व की लड़ाई थी।
डॉ. विलास खरात की यह कृति इतिहास लेखन में मौजूद पूर्वाग्रहों, जातिगत/वंशगत चश्मे और राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देती है। यह पुस्तक पाठकों को इतिहास को निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित और आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।
यह पुस्तक इतिहास के शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों और बहुजन/दलित परिप्रेक्ष्य से भारत के अतीत को समझने में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक विचारोत्तेजक रचना है।






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