Description
भिक्षु के पत्र प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षुक, लेखक और पालि भाषा के विद्वान भदंत आनंद कौसल्यायन (बचपन का नाम: हरनाम दास) द्वारा रचित एक अत्यंत लोकप्रिय और विचारोत्तेजक पुस्तक है।
इसमें लेखक ने एक बौद्ध भिक्षु के रूप में देश-विदेश की अपनी यात्राओं, जीवन के अनुभवों, बौद्ध धम्म/दर्शन, सामाजिक कुरीतियों, तथा मानव मूल्यों और समता पर अपने विचार पत्रों के माध्यम से व्यक्त किए हैं। इसकी भाषा अत्यंत सरल, सहज, बोधगम्य और रोचक है। जटिल दार्शनिक और सामाजिक विषयों को साधारण बोलचाल के अंदाज में पत्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।भदंत आनंद कौसल्यायन (1905–1988) 20वीं सदी के प्रमुख बौद्ध विद्वानों में से एक थे। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन से प्रेरणा लेकर बौद्ध धर्म अपनाया था। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ वर्धा में लंबे समय तक कार्य किया तथा पाली भाषा के ग्रंथों एवं जातक कथाओं का हिंदी अनुवाद कर हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।






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