Description
‘धर्मप्रिय’ भंवरसिंह सहवाल द्वारा लिखित पुस्तक “बौद्ध धर्म: आक्षेप, भ्रांतियां और उनका निवारण” (जिसे बौद्ध धम्म पर उठने वाले सादिश उत्तर व आरोपों के उत्तर रूप में भी जाना जाता है) बौद्ध दर्शन और इतिहास पर लिखे गए चर्चित ग्रंथों में से एक है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य बौद्ध धम्म के संबंध में फैलाए गए आक्षेपों, भ्रांतियों तथा भ्रमों का तार्किक, ऐतिहासिक और बौद्ध साहित्य (त्रिपिटक आदि) के संदर्भों से निवारण करना है।
लेखक ने बौद्ध धर्म पर विरोधियों द्वारा लगाए जाने वाले विभिन्न आरोपों (जैसे ईश्वर, आत्मा, कर्मकांड, पुनर्जन्म या सामाजिक व्यवस्था से जुड़े सवाल) का क्रमबद्ध और साक्ष्य-आधारित उत्तर दिया है।
लेखक ने तथागत बुद्ध के वैज्ञानिक व तार्किक दृष्टिकोण (‘अप्पो दीपो भव’) को उजागर करते हुए यह समझाने का प्रयास किया गया है कि धम्म अंधविश्वासों और कपोल-कल्पित कथाओं से अलग कैसे है।
भवरसिंह सहवाल जी ने इसमें पालि साहित्यों और प्रामाणिक ऐतिहासिक तथ्यों का सहारा लेकरविरोधियों के तर्कों को गलत सिद्ध किया है।
यह पुस्तक बौद्ध धर्म के अध्ययनकर्ताओं, बौद्ध दर्शन को समझने के इच्छुक पाठकों और बौद्ध धम्म से जुड़े वैचारिक प्रश्नों के समाधान की तलाश करने वालों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।






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