Description
“मूकनायक” (The Leader of the Mute/Silent) वास्तव में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा शुरू किया गया उनका पहला पाक्षिक समाचार पत्र (Fortnightly Newspaper) था, न कि एक पारंपरिक पुस्तक। हालाँकि, वर्तमान में डॉ. आंबेडकर द्वारा इसमें लिखे गए सभी संपादकीय लेखों और विचारों को एक संकलित पुस्तक के रूप में विनय कुमार वासनिक द्वारा सम्यक प्रकाशित किया गया है।
मूकनायक के हर अंक के शीर्ष (Header) पर महान संत तुकाराम जी का एक प्रसिद्ध अभंग छपता था:
“काये करूं आता धरुनिया भीड़। नि:शंक हे तीड चालविलों॥”
(अर्थ: अब संकोच करने से क्या लाभ? मैं बिना किसी डर के सच बोलने का मार्ग चुन रहा हूँ।)
इस पत्र को शुरू करने के लिए कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति शाहू जी महाराज ने ₹2,500 की आर्थिक सहायता दी थी।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा ‘मूकनायक’ में लिखे गए सभी 12 संपादकीय (जो 31 जनवरी 1920 से जुलाई 1920 के बीच लिखे गए थे) अत्यंत ऐतिहासिक और दूरदर्शी हैं।






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