Description
बौद्ध धम्म में कर्म (Karma) का सिद्धांत नैतिकता, उत्तरदायित्व और कारण-कार्य संबंध (Cause and Effect) पर आधारित है। पालि भाषा में इसे ‘कम्म’ (Kamma) कहा जाता है।
बौद्ध दर्शन में कर्म का अर्थ केवल “कार्य” नहीं, बल्कि कार्य के पीछे छिपी चेतना या नीयत (Cetanā) है। चेतना ही कर्म है (Intent is Everything)
भगवान बुद्ध का प्रसिद्ध कथन है:
“चेतनाहं भिक्खवे कम्मं वदामि” (हे भिक्षुओं! मैं चेतना को ही कर्म कहता हूँ।)
कुशल कर्मों के माध्यम से मन को शुद्ध करते हुए अंततः कर्म और उसके चक्र (संसार) से परे जाकर निर्वाण (Nibbāna) को प्राप्त करना है.।






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