Description
बौद्ध धर्म और सिंधु घाटी सभ्यता (मोहनजोदड़ो) के संबंधों तथा उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विभिन्न शोधकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए हैं।
लेखक और विचार-विश्लेषक स्वप्निल कुमार विश्वास (Swapnil Kumar Biswas) द्वारा रचित पुस्तक “बौद्ध धर्म: मोहनजो-दड़ो का धर्म” इसी विषय-वस्तु पर केंद्रित है।
पुस्तक के प्रमुख बिंदु:
* सिंधु सभ्यता और बुद्ध परंपरा का संबंध: लेखक का तर्क है कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त कई प्रतीक, मूर्तियां तथा पुरातात्विक अवशेष (जैसे ध्यानमुद्रा में बैठी आकृतियां, पीपल के वृक्ष का अंकन और चक्र) प्राचीन श्रमण या बौद्ध परंपरा के बीजारोपण का संकेत देते हैं।
* श्रमण संस्कृति की प्राचीनता: इस विश्लेषण के अनुसार, बौद्ध धर्म के मूल विचार केवल ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी (महात्मा बुद्ध के काल) तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़े भारत की सबसे प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी हुई हैं।
* वैदिक परंपरा से भिन्नता: पुस्तक में सिंधु सभ्यता के सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन को वैदिक कर्मकांडों से भिन्न बताते हुए इसे अहिंसा, ध्यान और समतावादी श्रमण संस्कृति का आधार माना गया है।






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