Description
“सम्राट असोक के राष्ट्रीय चिन्ह और धर्मनिरपेक्ष भारत” (सम्यक प्रकाशन) आधुनिक स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों और मौर्यकालीन स्थापत्य कला के ऐतिहासिक संबंधों की विस्तृत पड़ताल करती है।
पुस्तक में दर्शाया गया है कि स्वतंत्र भारत ने अपने राष्ट्रीय चिन्हों—जैसे सिंह चतुर्मुख स्तंभ (अशोक स्तंभ), अशोक चक्र और ‘सत्यमेव जयते’ के चयन में सम्राट अशोक की बहुसांस्कृतिक और समतावादी विरासत को प्राथमिक आधार बनाया।
लेखक के अनुसार, अशोक का ‘धम्म’ किसी एक विशिष्ट धार्मिक पंथ का प्रसार नहीं था, बल्कि वह नैतिक नियमों, सामाजिक सद्भाव और सभी संप्रदायों के प्रति आदर भाव का प्रतीक था। यही नीति आधुनिक भारतीय गणतंत्र के संविधान और ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) का मुख्य स्तंभ बनी।
पुस्तक अशोक स्तंभ के शीर्ष पर स्थापित चार सिंहों (साहस, शक्ति, आत्मविश्वास और गौरव) और चक्र (निरंतर प्रगति और धम्म/विधि का शासन) के प्रतीकात्मक अर्थों की गहन पुरातात्विक समीक्षा प्रस्तुत करती है।






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