Description
दलित साहित्य और इतिहास-लेखन के वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध साहित्यकार मोहनदास नैमिशराय की पुस्तक “इतिहास के आईने में दलित आंदोलन” भारतीय दलित आंदोलन के इतिहास, संघर्ष और उसकी वैचारिक यात्रा पर लिखी गई एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति है।
पुस्तक में भारत में दलित चेतना के शुरुआती उभार से लेकर आधुनिक दौर तक के आंदोलनों का सिलसिलेवार और दस्तावेजी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसमें आंदोलन से जुड़े विभिन्न पड़ावों, सम्मेलनों और ऐतिहासिक घटनाओं का प्रामाणिक विवरण है।
इस पुस्तक में लेखक नैमिशराय जी ने राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित ‘सत्यशोधक समाज’ के सामाजिक क्रांति के प्रयासों और तत्पश्चात डॉ. बी. आर. आंबेडकर द्वारा चलाए गए महाड़ सत्याग्रह, कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन तथा गोलमेज सम्मेलनों जैसे मील के पत्थरों का गहन विश्लेषण किया है।
यह पुस्तक शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भारतीय समाज एवं दलित आंदोलन के इतिहास को गहराई से समझने की इच्छा रखने वाले पाठकों के लिए एक अनिवार्य एवं संदर्भ योग्य ग्रंथ है।






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