Description
कांशीराम की नेक कमाई जिसने सोती कौम जगाई बहुजन समाज के बहुचर्चित लेखक और विचारक सतनाम सिंह द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पुस्तक है। यह पुस्तक बहुजन नायक कांशीराम के जीवन संघर्ष, उनकी दूरदर्शी राजनीति और शोषित-वंचित समाज को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के अभूतपूर्व प्रयासों पर केंद्रित है।
पुस्तक के शीर्षक के अनुसार, इसमें यह रेखांकित किया गया है कि कैसे मान्यवर कांशीराम ने सदियों से उपेक्षित और “सोती हुई” कौम (दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग) में राजनीतिक व सामाजिक चेतना का संचार किया।
लेखक ने कांशीराम द्वारा स्थापित प्रमुख संगठनों—BAMCEF (बामसेफ), DS4 (दलित शोषित समाज संघर्ष समिति) और बहुजन समाज पार्टी (BSP)—की स्थापना के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और उनकी ऐतिहासिक यात्रा का विस्तार से वर्णन किया है।
कांसीराम साहब के उस व्यक्तिगत समर्पण को दर्शाया गया है जिसके तहत उन्होंने अपना घर-परिवार, नौकरी और निजी सुख-सुविधाएं त्यागकर अपना पूरा जीवन समाज के स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित कर दिया। लेखक इसी समर्पण को उनकी “नेक कमाई” मानते हैं।
कांशीराम की वह अनोखी रणनीति जिसके माध्यम से उन्होंने केवल वोट बैंक बनने के बजाय बहुजन समाज को “हुक्मरान समाज” (शासक वर्ग) बनने का मंत्र दिया, इस पुस्तक का एक प्रमुख आकर्षण है।
यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि यह बहुजन आंदोलन के विचार, इतिहास और कार्यशैली को समझने की एक प्रामाणिक गाइड है। सतनाम सिंह ने अपनी सरल और प्रभावशाली शैली में यह समझाने का सफल प्रयास किया है कि किस तरह एक अकेले व्यक्ति के संकल्प ने भारतीय राजनीति और सामाजिक ताने-बाने की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।
यदि आप भारतीय राजनीति में बहुजन आंदोलन के उभार और मान्यवर कांशीराम के विचारों को गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक एक आवश्यक दस्तावेज़ है।






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