Description
डॉ. जगन्नाथ उपाध्याय भारत के प्रख्यात बौद्ध दार्शनिक, पाली साहित्य के विद्वान और विचारक रहे हैं। उनकी पुस्तक/रचना “बुद्ध का धम्म: बहुजन हिताय बहुजन सुखाय” भगवान बुद्ध के विचारों, बौद्ध दर्शन और सामाजिक कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है।
बुद्ध धर्म का मूल आधार व्यक्तिगत मोक्ष या सीमित समूह कल्याण न होकर “अधिक से अधिक लोगों का हित और अधिक से अधिक लोगों का सुख” है।
डॉ. उपाध्याय ने इस पुस्तक में स्पष्ट किया है कि बुद्ध का धम्म केवल एक आध्यात्मिक विचार नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के व्यावहारिक कल्याण का मार्ग है।
पुस्तक में बुद्ध कालीन सामाजिक व्यवस्था, वर्ण-व्यवस्था के विरोध और बौद्ध धर्म में समतावादी विचारों पर गहराई से विचार किया गया है।
इसमें यह दर्शाया गया है कि धम्म किस प्रकार जाति, वर्ग और लिंग के भेदभाव से परे हटकर सभी मनुष्यों को समान अवसर और अधिकार देता है।
प्रो. जगन्नाथ उपाध्याय ने इसमें ‘धम्म’ और पारंपरिक ‘कर्मकांडी धर्म’ के अंतर को उजागर किया है।
बुद्ध का धम्म आचार, नीति (Morality), विवेक और प्रज्ञा (Wisdom) पर बल देता है, न कि अलौकिक शक्तियों या कर्मकांडों पर।
पुस्तक में बौद्ध दर्शन को आधुनिक समाजवाद और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से जोड़कर देखा गया है। यह बताती है कि आज के समय में शोषणमुक्त और समतामूलक समाज के निर्माण में बुद्ध की शिक्षाएं किस प्रकार उपयोगी हैं।
डॉ. जगन्नाथ उपाध्याय (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व प्रोफेसर) बौद्ध न्याय, दर्शन और पाली भाषा के महान शोधकर्ता थे। उन्होंने बौद्ध दर्शन को जन-कल्याण और भारतीय सामाजिक व्यवस्था के पुनर्गठन के संदर्भ में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।






Reviews
There are no reviews yet.