Description
इस पुस्तक में लेखक भद्रशील रावत ने ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टिकोण से यह विश्लेषण करने का प्रयास किया है कि भारत सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों और औपनिवेशिक शक्तियों का गुलाम क्यों रहा। पारंपरिक इतिहास में केवल आपसी राजनीतिक फूट को गुलामी का कारण माना जाता है, लेकिन लेखक इसके पीछे गहरे सामाजिक व धार्मिक कारणों को रेखांकित करते हैं:
यह पुस्तक विशेष रूप से उन सामाजिक रूढ़ियों और व्यवस्थाओं पर प्रहार करती है, जिन्होंने भारतीय समाज को भीतर से कमजोर किया और जिसके परिणामस्वरूप बाहरी आक्रमणकारी यहाँ आसानी से शासन करने में सफल रहे।






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