Description
‘ब्राह्मण श्रमण संस्कृति का संघर्ष’ भारतीय इतिहास, दर्शन और सामाजिक व्यवस्था के विश्लेषण पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है। इस पुस्तक के लेखक भगीरथ हैं।
यह पुस्तक भारतीय समाज और चिंतन परंपरा में रही दो मुख्य धाराओं—ब्राह्मण संस्कृति और श्रमण संस्कृति (बौद्ध, जैन, आजीविकादि)—के ऐतिहासिक, वैचारिक और सामाजिक संघर्ष को रेखांकित करती है।
ब्राह्मण संस्कृति वर्ण व्यवस्था, कर्मकांड, यज्ञ, जातिगत पदानुक्रम और वेदों की प्रामाणिकता पर बल देती है।
श्रमण संस्कृति समता, अहिंसा, कर्मफल, तर्क, प्रत्यक्ष अनुभव और जाति-विहीन समाज की अवधारणा पर आधारित है।
पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि कैसे इन दोनों संस्कृतियों के बीच चले वैचारिक और सामाजिक संघर्ष ने भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया।
लेखक ने श्रमण परंपरा के बहुजन, शोषित और उपेक्षित वर्गों पर पड़े सकारात्मक प्रभावों तथा सामाजिक परिवर्तन में इसकी भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया है।
यह पुस्तक उन पाठकों, शोधकर्ताओं और विचारकों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो भारतीय इतिहास, समाजशास्त्र और दर्शन को निष्पक्ष एवं आलोचनात्मक दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं।






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