Description
‘श्रामणेर विनय’ प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान और भिक्षु भिक्षु धर्मरक्षित (Bhikshu Dharmrakshit) द्वारा लिखित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रामाणिक पुस्तक है। यह पुस्तक बौद्ध संघ में नव-दीक्षित भिक्षुओं (श्रामणेरों) के आचार-विचार, नियमों और अनुशासन पर आधारित है
बौद्ध धर्म में गृहस्थ (उपासक) और प्रव्रजित (भिक्षु/श्रामणेर) दोनों के लिए जीवन शैली और नियमों में भिन्नता होती है। जब कोई व्यक्ति या बालक बौद्ध संघ में प्रवेश करता है, तो उसे उपसंपदा (पूर्ण भिक्षुत्व) प्राप्त होने से पहले ‘श्रामणेर’ कहा जाता है
इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य नव-दीक्षित श्रामणेरों को बौद्ध संघ के अनुशासन, व्रतों और दैनिक नियमों से भली-भांति परिचित कराना है, ताकि वे अपने शील और आचरण को शुद्ध रख सकें।






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