Description
“पुराणों में बुद्ध” डॉ. सुरेंद्र अज्ञात द्वारा संपादित/लिखित एक शोधपरक पुस्तक है, जिसमें हिंदू पौराणिक ग्रंथों (पुराणों) में भगवान बुद्ध और बौद्ध धर्म के चित्रण की आलोचनात्मक समीक्षा की गई है। डॉ. सुरेंद्र अज्ञात प्रसिद्ध समाजशास्त्री, शोधकर्ता और अनिश्वरवादी विचारक हैं, जिन्होंने प्राचीन भारतीय साहित्य और धर्मग्रंथों का तार्किक अध्ययन किया है।
पुस्तक के मुख्य विचार और विषय-वस्तु:
बुद्ध को अवतार के रूप में प्रस्तुत करने का विश्लेषण: पुराणों (जैसे विष्णु पुराण, अग्नि पुराण, मत्स्य पुराण आदि) में बुद्ध को भगवान विष्णु का 9वां अवतार माना गया है। इस पुस्तक में इस बात की पड़ताल की गई है कि ऐतिहासिक बुद्ध को पौराणिक व्यवस्था में किस तरह और किस उद्देश्य से शामिल किया गया।
विरोधाभासी संदर्भ: पौराणिक ग्रंथों में एक ओर बुद्ध को अवतार माना गया है, तो दूसरी ओर उनके उपदेशों को “दैत्यों/असुरों को भटकाने वाला” या “मोह उत्पन्न करने वाला” (मायामोह) कहा गया है। पुस्तक में इन अंतर्विरोधों के सामाजिक और ऐतिहासिक कारणों को उजागर किया गया है।
बौद्ध धर्म के पतन का ऐतिहासिक संदर्भ: लेखक ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि कैसे बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को आत्मसात करके और साथ ही बुद्ध का ध्रुवीकरण करके भारत में बौद्ध दर्शन के प्रभाव को कम किया गया।
तार्किक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण: डॉ. सुरेंद्र अज्ञात ने संस्कृत श्लोकों और पौराणिक संदर्भों के मूल उद्धरण देकर इस विषय का वैज्ञानिक व ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो प्राचीन भारतीय इतिहास, बौद्ध दर्शन और पौराणिक साहित्यों के परस्पर संबंधों को आलोचनात्मक दृष्टि से समझना चाहते हैं।






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